आयुष श्रीवास्तव / वीरेन्द्र नाथ/ अंकुर मिश्रा
विंढमगंज/दुद्धी (सोनभद्र)।
रेलवे बोर्ड द्वारा धनबाद से भोपाल के बीच नई ट्रेन के संचालन को हरी झंडी दिए जाने के बाद सोनभद्र जनपद के दुद्धी और विंढमगंज क्षेत्र में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
नई ट्रेन की ठहराव सूची में इन दोनों महत्वपूर्ण स्टेशनों को शामिल न किए जाने से क्षेत्रवासियों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्र के साथ एक बार फिर सौतेला व्यवहार है।

दुद्धी तहसील क्षेत्र प्रशासनिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां तहसील, कचहरी, ब्लॉक कार्यालय, महाविद्यालय, इंटर कॉलेज, नगर पंचायत सहित कई प्रमुख संस्थान स्थित हैं।
इसके बावजूद रेलवे द्वारा दुद्धी स्टेशन को नई और लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव से लगातार वंचित रखा जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि वर्षों से दुद्धी की उपेक्षा की जा रही है, जबकि यहां से प्रतिदिन सैकड़ों यात्री विभिन्न राज्यों के लिए सफर करते हैं।
वहीं झारखंड–उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित विंढमगंज रेलवे स्टेशन सैकड़ों गांवों के लिए प्रमुख आवागमन केंद्र है। इस स्टेशन पर झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के यात्रियों की बड़ी संख्या निर्भर है।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि पिछले वर्ष रेल रोको संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन कर रेलवे प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था। उस दौरान कई ट्रेनों के ठहराव का आश्वासन भी मिला था, लेकिन अब तक सिर्फ सिंगरौली–पटना ट्रेन का ही ठहराव विंढमगंज में हो पाया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ठहराव न होने के कारण छात्रों को पढ़ाई, मरीजों को इलाज, कर्मचारियों को नौकरी और व्यापारियों को कारोबार के लिए दूर-दराज के स्टेशनों पर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है। खासकर आपात स्थिति में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और संघर्ष समितियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही धनबाद–भोपाल सहित अन्य प्रमुख ट्रेनों का ठहराव दुद्धी और विंढमगंज में सुनिश्चित नहीं किया गया, तो व्यापक जन आंदोलन छेड़ा जाएगा। क्षेत्र की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रही है और रेलवे प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है।
