प्रयागराज।
शंकराचार्य मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। संबंधित पक्षों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाले प्रशासन के पास अब केवल 48 घंटे शेष हैं, जिनके भीतर शंकराचार्य से औपचारिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।
बताया जा रहा है कि यदि तय समयसीमा के भीतर माफी नहीं दी गई, तो शंकराचार्य बिना स्नान किए ही माघ मेले से प्रस्थान कर सकते हैं। शंकराचार्य से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्थिति धार्मिक दृष्टि से अत्यंत गंभीर मानी जाएगी और इसे “अभूतपूर्व महापाप” के रूप में देखा जा रहा है—ऐसा कार्य जो न पहले कभी हुआ है और न भविष्य में होने की कल्पना की जाती है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन पर तीखे आरोप भी लगाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि महाकुंभ के दौरान हुई भगदड़ में मारे गए हिंदू श्रद्धालुओं के मृत शरीरों को कथित तौर पर भगदड़ की आधिकारिक सूची से बाहर रखा गया, मृतकों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई, और कुछ मामलों में आर्थिक लेन-देन के ज़रिये मामलों को दबाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आलोचकों का कहना है कि जिन पर इस तरह के गंभीर आरोप लग रहे हैं, उनके लिए शंकराचार्य से माफी न मांगना भी एक मामूली बात समझी जा रही है। इस तुलना को एक रूपक के ज़रिये व्यक्त करते हुए कहा गया कि जैसे सब्ज़ी खरीदने के बाद दुकानदार द्वारा थोड़ी सी धनिया-मिर्च मुफ्त में डाल देना कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती, उसी तरह इस पाप को भी हल्के में लिया जा रहा है।
फिलहाल, सभी की निगाहें आने वाले 48 घंटों पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या शंकराचार्य माघ मेले में स्नान करेंगे या बिना स्नान किए प्रस्थान का फैसला लेंगे।
